नमस्कार दोस्तों। आज की मेरी All Travel Story की यात्रा Pura Mahadev Mandir के दर्शन की है जिसे परशुराम के महादेव और Parshurameshwar Mahadev Mandir भी कहते हैं । यह एक प्राचीन सिद्धपीठ है । ऐसा माना जाता है की स्वयं परशुराम जी ने अपनी माता का सिर काटने के पश्चाताप में यहां शिवलिंग की स्थापना की और तपस्या की थी । भगवान् शंकर ने प्रसन्न् होकर उनकी माता को जीवित किया था और परशुराम जी को अजेय फरसा दिया था। ये मेरी देवी शाकुम्भरी के बाद की अगली यात्रा है।Pura Mahadev Mandir
नमश्कार @Durgeshvlogs
हिंदी में एक कथा को देखकर बहुत खुशी हुई।
हालाँकि, एक ही भाषा में लेखन को बनाए रखते तो और अच्छा होता।
ये परशुराम महादेव मंदिर कितना पुराना है?
एक विनम्र सुझाव। इस मंच पर कोई बाहरी लिंक साझा करना पसंद नहीं किया जाता है तो उसे निकालना ही अच्छा होगा।
नमस्कार जी ![]()
लिखते समय सामान्यतः विचार जिस भाषा मे आते हैं तो उसी फ्लो में लिखता रहता हूँ।
परशुराम जी का मंदिर के वर्षों की गणना का तो अनुमान नही है परंतु पुजारियों के अनुसार सतयुग में श्री राम आये थे और ये परशुरामजी का अंतिम समय था इसके बाद वे कैलाश पर तपस्या के लिए गए थे।
आपके सुझाव का सम्मान
परंतु क्या पूरा लेख चित्र के साथ यहाँ दिया जा सकता है? (इसका मुझे ज्ञान नही)। इसीलिए बाहरी लिंक दिया कि ताकि सम्पूर्ण लेख पढ़ा जा सके।
Really it’s very tough to write in pure Hindi language.
Your valuable comments always Welcome ![]()
